मेरा बचपन मेरी मम्मा की नज़र से...

Tuesday, October 12, 2010

जानिए छोटू पंडित का भेद------------------अनुष्का

कुछ महीनो पहले मम्मा ने उनके ब्लॉग काव्य तरंग पर एक पोस्ट डाली थी छोटू पंडित का मंत्रपाठ......जब मैंने श्री गायत्री महामंत्र कंठस्थ किया था   अब मैं और भी मंत्र और श्लोक सिख रही हूँ लेकिन तोतली भाषा के कारण उच्यारण शुद्ध नहीं हो पाते पर मम्मा कहती है....... बड़ी बात इन्हें कंठस्थ करना है, उच्यारण समय के साथ सुधारते जाएंगे इस गणेशोत्सव के दौरान मैंने गणेश मंत्र भी अच्छे से सिख लिया है जोकि इस प्रकार है ...
वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
पहले इसलिए पढ़वा रही हूँ ताकि सुनकर आप समझ सके अपनी तुतली भाषा में, मैं यही बोल रही हूँ तो सुनिए आप एक बार फिर से मेरा "छोटू पंडित" का मंत्रपाठ :)


अब आपको एक और रोचक बात बताती हूँ जब कभी मैं ऐसे मंत्रपाठ करती हूँ मम्मा मुझे छोटू पंडित किस लिए बुलाती है ...उसके पीछे कारण यह है कि मेरे पापा का पैत्रक स्थान "राजपुर" इंदौर के थोड़ा आगे बड़वानी के पास है जहाँ दादू के दादाजी राजदरबार में खजांची हुआ करते थे अपना कार्यकाल समाप्त होने पर उन्हें राजा साहब ने सत्यनारायण मंदिर की स्थापना करवा कर दी उसके बाद उन्होंने और  पापा के दादाजी ने सभी ने अपने दुसरे कार्य के साथ साथ मंदिर की सेवा भी की है आज भी दादी माँ( पापा की दादी ) वहाँ रहती है और सत्यनारायण स्वामी की सेवा में ही अपना समय देती है ....सभी लोग समय समय पर वहाँ जाते है
पापा के पड़ दादा जी के ज़माने से हमारे मंदिर में कूल की हर दम्पति का खानदानी पोज़

जब मैं इण्डिया गई थी तो मैं भी वहाँ जाकर दादी माँ के पास बहुत दिन रही थी मुझे तो मंदिर में बहुत अच्छा लगता था मेरे वहाँ होने की ख़ुशी में मेरी दादी माँ ने मंदिर में श्री सत्य नारायण भगवान की कथा रखी और गावँ भर को बुलाया और मिठाई बाटी दादी माँ भी मुझे बहुत बहुत प्यार करती है

दादू  दादी , दादी माँ और छोटे छोटे चाचू  भुआ के साथ मज़े रहे 

 संध्या आरती के समय जब ढ़ेर सारे लोग आते तो मैं भी जोर जोर से ताली बजाती घंटे और शंख की आवाज़ मुझे बहुत अच्छी लगती मेरे छोटे छोटे चाचू और भुआ मुझे खैलने के लिए मंजीरे भी देते



 तो विरासत में मिली इस खानदानी पंडित की पदवी के कारण ही मम्मा मुझे छोटू पंडित बुलाती है कभी कभी वैसे मम्मा ने तो मेरे ढ़ेर नाम रखे हुए है ..........प्यार से जो दिल चाहे वाही मेरा नाम कर देती है :)
 
अपनी इण्डिया की यात्रा में राजपुर मैं की मौज मस्ती मुझे बहुत अच्छी लगी जब मैं राजपुर गई थी वहाँ सभी ने मुझे बहुत प्यार दिया और आज भी सब लोग मुझे वहाँ बहुत याद करते है जब भी फोन पर बात होती है फिर कब आओगी यही पूछते है मम्मा को भी राजपुर अच्छा लगता है...... वो कहती है वहाँ गावँ के लोगों में बहुत प्रेम भाव है ...
राजपुर मंदिर के बाहर के परिसर में खेलते हुए बच्चों को देख में हँस रही हूँ

25 comments:

संजय भास्कर said...

नन्ही परी बहुत प्यारी लग रही है ।

संजय भास्कर said...

अनुष्का को
प्यार सहित शुभकामनाएं

गिरीश बिल्लोरे said...

नन्ही परी को प्यार

Krishna Kr. Yadav said...

बिटिया की फोटो तो बहुत प्यारी है..काला टीका जरुर लगा दें. आप सभी को नवरात्र की शुभकामनायें !!

इस्मत ज़ैदी said...

बहुत प्यारी बिटिया हो तुम अनुष्का ,मम्मी का हमेशा ऐसे ही कहना मानना

ढेर सारा आशीर्वाद और शुभकामनाएं तुम्हारे लिये

अजय कुमार झा said...

बाप रे ई तो कमाल का निकली छोटू पंडित ...पंडित जी को हमारा भी प्रणाम और ढेर सारा आशीर्वाद ..

Akshita (Pakhi) said...

छोटू पंडित जी..आप तो बहुत क्यूट लग रही हो.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

छोटू पंडित को प्रणाम ...बहुत सुन्दर संस्कार ..

सारी फोटो बहुत प्यारी हैं ..

ढेर सारी शुभकामनायें ..

माधव( Madhav) said...

अच्छे संस्कार सीख रही है आप . आपके माता पिता प्रशंशनीय कार्य कर रहे है .

प्यार सहित शुभकामनाएं

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

बहुत अच्छी बात है कि आप धर्म के प्रति अभी से इतनी रूची ले रही हैं...
अनुष्का धर्म हमें आध्यात्मिक ज्ञान और मानसिक शांति प्रदान करता है.

Udan Tashtari said...

अरे वाह!! छोटू पंडित तो कमाल कर रही है...

मम्मा तो बिल्कुल सही कहती है....... बड़ी बात इन्हें कंठस्थ करना है, उच्यारण समय के साथ सुधारते जाएंगे...

बहुत अच्छा लगा सुन कर और तस्वीरें देखकर.

नवरात्र की शुभकामनायें !

Pankhuri Times said...

अरे वाह मुझे भी निन्ना (मंदिर) जाना और तालियाँ बजा कर कीर्तन करना बहुत अच्छा लगता है. love you Anushka di.

ताऊ रामपुरिया said...

छोटू पंडितजी को प्रणाम, तो छोटू पंडीत जी महाराज राजपुर क रहने वाले अहिम, अब ताऊ से मिले बिना मत जाना. कब आ रही हो? ये सब मंत्र हाम्को भी सिखाना यहां आवो तब.

रामराम.

ताऊ रामपुरिया said...

छोटू पंडितजी को प्रणाम, तो छोटू पंडीत जी महाराज राजपुर क रहने वाले अहिम, अब ताऊ से मिले बिना मत जाना. कब आ रही हो? ये सब मंत्र हाम्को भी सिखाना यहां आवो तब.

रामराम.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

अले बाह ले बाह!! हम त ई छोटू पण्डित जी का चरन स्पर्स करना चाहते हैं... बंगाल में बेटियों को माँ कहते हैं..त हम भी माँ का आशिर्बाद माँग रहे हैं.
बहुत सुंदर परिचय!

Kailash C Sharma said...

छोटू पंडित को बहुत प्यार और शुभ कामनाएं....

मनोज कुमार said...

बहुत खूबसूरत तस्वीरें। ढेरों प्यार और आशीष।

रावेंद्रकुमार रवि said...

अनुष्का की तस्वीरों ने तो मन मोह लिया!

ललित शर्मा said...

जय हो छोटू पंडित की।

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
नवरात्र के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

साहित्यकार-6
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

चैतन्य शर्मा said...

अनुष्का.... बहुत क्यूट लग रही हो...

काजल कुमार Kajal Kumar said...

यह परी सी गुड़िया तो बहुत सुंदर है !

Sadhana Vaid said...

प्यारी अनुष्का की मनमोहिनी सूरत और मीठी-मीठी बातें मन को बहुत ही आल्हादित कर जाती हैं ! मम्मी आपको इतने अच्छे संस्कार और धर्म की शिक्षा दे रही हैं कि आप दोनों पर बहुत गर्व होता है ! आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

प्यारी सी अनुष्का को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Chinmayee said...

बहुत क्यूट लग रही हो ...

विजय दशमी की शुभकामनायें !

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