मेरा बचपन मेरी मम्मा की नज़र से...

Friday, October 1, 2010

पापा की परी की एक प्यारी याद ...............अनुष्का

पापा की परी हूँ मैं 
अब जब मैं ३ महीनो की हो गई थी  मुझे  लोगों की और खिलोनो की समझ आने लगी थी .सारा दिन तो पापा और चाचू  मेरे साथ मस्ती कर नहीं सकते इसलिए पापा ने मुझे ढ़ेर सारे रंग बी रंगे खिलोने लाकर दिए जो टच करने पर बोलते भी थे .फिर क्या था इतने सारे खिलोने सब के सब मेरे दोस्त बन गए मैं उनसे और वो मुझसे बातें किया करते थे सारा सारा दिन .

एल्मो मेरा साथी .....ही ही ही ऐसे ही हँसता है सारा दिन

एल्मो और पू बियर तो मुझे बहुत लुभाते ..एल्मो की हँसीं सुनकर मैं भी हँसने लगती और पू बियर के साथ भी उसका म्युज़िक सुनकर अच्छा लगता


प्यारे पू बियर के साथ साथ हो गई ढ़ेर सारे खिलोनों से दोस्ती
शाम को पापा जब ऑफिस से घर चले आते मेरी तो ख़ुशी बहुत बढ़ जाती और मैं अपने पापा की गोद से निचे ही नहीं आती ...पापा भी मुझे बहार घुमाते और ढ़ेर सारा प्यार करते


पापा की परी पापा के साथ खुश 
जब मुझे ४था महिना लगा मेरी डाक्टर ने मम्मी से कहा मुझे अब रंगों की भी समझ आने लगी है . अलग अलग रंग मुझे अब बहुत लुभाते है, तब तो मम्मा ने सारे घर में रंग रंग की फ्रिल्स और पेपर फ्लावर लगा दिए रंगीन चमकीला झूमर भी मम्मा सुबह शाम मालिश कर के मुझे खूब कसरत कराती और निचे लेटा देती और में छत और दीवार पर यह रंगीन सजावट देख देख कर खूब खुश होती ज़ोर ज़ोर से पैर मार कर उन्हें पकड़ने  की कौशिश किया करती






मालिश करा कर स्ट्रोंग हो रही हूँ 
अब थोड़ी कसरत की जाए :)
मुझे मस्ती करता देख एक बार मम्मा ने यह प्रिंसेस क्राउन लगा कर मेरी फोटो ली मेरी डाक्टर (निरंजना राजन ) ने देखते ही कहा अनुष्का तो इसमे प्रिंसेस नहीं प्रिंस लगती है . न्यू जर्सी में डाक्टर राजन के ऑफिस में अब भी मेरी यह तस्वीर लगी हुई है .
तो आप क्या कहेंगे प्रिंसेस या प्रिंस ??
इन सब बातों के साथ मम्मा मुझे एक और बात बताया करती है..... इसी दौरान हमारे घर के सामने वाले घर में एक दंपत्ति रहने आई वद्ध थे. अमेरिकन ही थे, इसलिए मम्मा मुझे कहती ये ग्रेंपा ग्रेन्मा है . जब भी वो मुझे देखते दूर से ही खिलाते मुस्कुराते और चले जाते क्योंकि यहाँ लोग औपचारिक ज्यादा होते है यूँ किसी से सहज नहीं हो पाते......लेकिन मैं क्या करू मुझे तो उन्हें देख अपने दादा दादी याद आजाते और मैं तो उनके पास जाने को मम्मा की गोद से लटक ही जाती . एक दिन उन्होंने भी मुझे गोद में लिया कहने लगे मुझे लगा तुम मेरी बड़ी बड़ी दाढ़ी से डर जाओगी लेकिन तुम तो बहुत प्यारी हो .....बस वो दिन, उसके बाद तो जब तक मैं इण्डिया गई तब तक रोज़ ही दोपहर में वो मुझे लेने आते साथ में एक डाइपर भी ले लेते और मम्मा को आराम करने को कहते ...उन्होंने मम्मा को बताया था उनके ५ बच्चे और १० पोते पोती है लेकिन सब अलग अलग स्टेट्स में है . बस साल में एक बार मिलते है .....जब मैं इण्डिया से लौटी तो हम नए घर में आगये एक दिन मम्मा ने वहाँ पुराने घर में जाकर देखा तो वो लोग भी चले गए थे ......अब वो जाने कहाँ होंगे लेकिन उनका प्यार एक खुबसूरत याद के रूप में मेरे साथ रहेगा .    
                                                         

आज दो और खास बातें बतानी है आपको मम्मी की पोल खोली नानाजी ने देखे  (माँ-बेटी की बात --संजीव 'सलिल')
महात्मा गाँधी और शास्त्री जी के अलावा मेरे खास दोस्त का जन्मदिन भी है आज ही ...बधाई ! (जज़्बात : एक साल का सफ़र)

16 comments:

Sunil Kumar said...

अनुष्का के बालपन के चित्रों का क्या कहना परी है

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

अनुष्का की कहानी,
रानी की जबानी,
पढ़कर बहुत अच्छा लगा!
--
तुम्हारे सुन्दर चित्रों ने तो
नाना जी का मन मोह लिया!

Arvind Mishra said...

वाह बहुत सुन्दर बेटी रानी !

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

इतने प्यारे प्यारे रूप में सभी की प्यारी दुलारी हो तुम अनुष्का...
और जज़्बात को ’हैप्पी बर्थ डे’ की विश के लिए चाकलेट भी मिलेगी...
तो कब आ रही हो अपने वतन!

वाणी गीत said...

नन्ही परी को बहुत दुलार ...
मन खुश हो गया इतनी प्यारी तस्वीरें देख कर ...!

ताऊ रामपुरिया said...

अरे अनुष्का सच में बहुत सुंदर चित्र है प्रिंस के.:) प्यार.

रामराम.

संजय भास्कर said...

अनुष्का की कहानी,
पढ़कर बहुत अच्छा लगा!

माधव( Madhav) said...

very intersting flash back story

S.M.MAsum said...

अनुष्का janm din Mubarak ho.

रावेंद्रकुमार रवि said...

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हर फ़ोटो -
एक से बढ़कर एक -
ख़ुशियों से भरा-पूरा!
--
अनुष्का को प्यार ही प्यार!

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संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत बढ़िया चल रही है यादों की श्रृंखला ...प्यारी परी को ढेर स प्यार ....तुमको देख कर किसका मन नहीं होगा कि गोद में उठा लें ..:):)

निर्मला कपिला said...

ानुषका कहानी तो बाद मे सुनेंगे आज तुम इतनी क्यूट लग रही हो कि पहले गोदी मे उठा कर लाड लडा लूँ। तुम्हारी मम्मी बहुत अच्छी तरह लिखती हैं तुम्हारी कहानी। आशीर्वाद।

खुशदीप सहगल said...

मेरे घर आई एक नन्ही परी,
चांदनी के रथ पे सवार,
हो, मेरे घर आई एक नन्ही परी.
उसकी बातों में शहद सी मिठास...

जय हिंद...

Udan Tashtari said...

Are waah!! Anushka..so cute...:)

शरद कोकास said...

बहुत प्यारी लग रही है ।

बी एस पाबला said...

नन्ही परी को बहुत सारा दुलार ..
सच्ची मुच्ची की परी