मेरा बचपन मेरी मम्मा की नज़र से...

Tuesday, September 21, 2010

ओ चाचू , आल ईज़ वेल ......................अनुष्का

आपको पता है इन दिनों इण्डिया से मेरे चाचू (प्रणव जोशी ) यहाँ यू.एस. आए हुए है ......मैं पुरे २ साल के बाद अपने चाचू से मिली तो मुझे बहुत अच्छा लगा । हालाँकि चाचू यहाँ अपने ऑफिस के काम से ही आए है लेकिन वीकेंड में तो वो मुझे ही समय देते है । हम दोनों मिल कर ढ़ेर सारी मस्ती भी करते है और मैं उन्हें नई नई जगह घुमाने भी लेजाती हूँ । यानि आप समझ ही गाए होंगे चाचू के आने पर तो आपना आल ईज़ वेल ही होगया है । आप भी देखिये इन फोटोस में .....


मैं और चाचू ...पीछे हालीवुड हील है

चाचू और मैं लॉस एंजेलिस कोडेक थिएटर की एंट्रेंस पर हैं


हमारी मस्ती तो हमेशा चलती रहती है ऐसे ही ....

चाचू मेरी हर ईच्छा पूरी करते है .....देखिये पोनी राईड भी दिलाई

और मैं खुश होकर चाचू को "आल ईज़ वेल " सॉंग सुनती हूँ....


हम दोनों ने पेटिंग ज़ू में एनिमल्स को फीड भी किया था

हम लोग साथ में बीच पर सेंड में भी खेले


तो कहिये..... है न ?? चाचू के साथ आल ईज़ वेल :)

13 comments:

गजेन्द्र सिंह said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति .......

पढ़े और बताये कि कैसा लगा :-
(क्या आप भी चखना चाहेंगे नई किस्म की वाइन !!)
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_22.html

ललित शर्मा said...

चाचू के साथ धींगा मस्ती चल रही है...
बहुत बढ़िया......चाचू को भी राम राम

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

अनुष्का जी आपके और आपके चाचू के फोटो बहुत बढ़िया लग रहे है!

Vivek Rastogi said...

अरे वाह अनुष्का वाकई चाचू के साथ ऑल इस वेल हो गया।

बहुत अच्छे...

रंजन said...

वाह.. इतनी मस्ती के बाद चाचू जल्दी जल्दी आया करेंगे...

प्यार..

निर्मला कपिला said...

वाह दोनो चाचू भतीजी मस्त मस्त। आशीर्वाद।

माधव said...

अरे वाह , आल इज वेल तो मेरा भी पसंदीदा सोंग है , कही भी सुनता हूँ , जोर जोर से गाने लगता हूँ .
चाचू के साथ खूब मस्ती हो रही है , इसी बहाने हम भी तुम्हारे साथ घूम लिए , तसवीरें बहुत सुन्दर है .प्यार

संजय भास्कर said...

वाह.. इतनी मस्ती के बाद चाचू जल्दी जल्दी आया करेंगे...

Ramesh Sharma said...

इस पोस्ट को पढ़ कर मुझे गीत की वो पंक्तियाँ याद आ गयी. आ रे बचपन तू आ... मुझे शुरू से पसंद था और आज फिर याद आया आपकी पोस्ट को पढ़ कर. सहेज कर रखा गया बचपन. स्वर्णिम स्मृतियों का नायाब खजाना. सचमुच सुहाना .

Udan Tashtari said...

खूब मस्ती चल रही है चाचू के साथ...चाचू तो तुम्हारे बिल्कुल हीरो हैं भई..

रावेंद्रकुमार रवि said...

ऐसी मस्ती देखकर तो हमारा मन भी
मस्ती करना चाहने लगा!

महफूज़ अली said...

अरे वाह .... बेटा ने तो खूब मज़े किये.....

ताऊ रामपुरिया said...

ओह कितना मजा लिया तुमने चाचू के साथ? जरा वो वाला गित भी तो पोडकास्ट करो जो तुमने चाचू को सुनाया था.

रामराम.