मेरा बचपन मेरी मम्मा की नज़र से...

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Tuesday, September 21, 2010

पंख होते तो .....................अनुष्का

अब मैं दो महीने की हो चुकी थी ....दादू दादी के साथ मेरे दो महीने कैसे बीते ना मुझे पता चला न उन्हें । वैसे तो दादू दादी को ५-६ महीनो के लिए रुकना ही था लेकिन उधर इण्डिया में मेरी दादी माँ की तबियत ठीक नहीं रहने लगी इसीलिए दादू दादी ने ३ महीने के बाद ही जाना तय कर लिया । उन्होंने तो यही सोचा था की कुछ और महीनो में मेरा पासपोर्ट भी आजाएगा फिर वो मम्मा और मुझे साथ ही लेकर जाएंगे पर ऐसा नहीं हुआ । मेरा तो पासपोर्ट अभी बन कर आया ही नहीं था और उनके जाने का दिन आगया ....सब लोग बहुत उदास थे और मैं भी
दादी
की गोद की आदत भी लग गई थी मुझे तो और दादी मुझे जो हमेशा लोरी सुनाती थी "मेरा बुलबुल सो रहा है " उसे तो मैं बहुत ही ज्यादा मीस करने वाली थी .......


तब ऐसा ही लगा की यह अगर डाक्यूमेंट्स का चक्कर न होता तो अच्छा ही होता या फिर मेरे पंख ही होते तो उड़ कर उनके साथ चली जाती .......
एयरपोर्ट
के लिए निकालने से पहले की उनके साथ मेरी यह तस्वीर ...