मेरा बचपन मेरी मम्मा की नज़र से...

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Thursday, October 14, 2010

अन्न प्राशन संस्कार को आए मामा -----------------------अनुष्का

जैसा की मैंने आपको बताया था की मैं ५ महीनों की होने को थी लेकिन मेरा पी. आई. ओ. कार्ड तो अब तक आया नहीं था. इस कारण मैं इण्डिया नहीं जा पारही थी . अन्न प्राशन तो मामा के हाथों होना था. सब लोग दुविधा में ही थे कि मेरे प्यारे नितिन मामा ने किया मेजिक..................मैं नहीं जा पारही थी तो क्या नितिन मामा खुद चले आए और लाए ढ़ेर सारे प्यारे प्यारे गिफ्ट्स.
अन्न प्राशन संस्कार के दिन मम्मा पापा ने मिलकर खूब अच्छे से हमारे घर को सजाया, मम्मी और उनकी फ्रेंड्स ने मिलकर तरह तरह के पकवान बानाए .पूजा रचा के बाद मामा ने अपने हाथों से चाँदी कि कटोरी में चाँदी के चम्मच से मुझे खीर खिलाई और मेरी आरती की. इस दिन मामा चाँदी के ५ पात्र लाए मेरे भोजन करने को और खेलने को एक चाँदी का झुन झुना भी ....
नितिन मामा मुझे खीर खिला रहे है 

मामा मुझसे मिल कर बड़े खुश है और मैं भी .....अब खाना शुरू 
उसके बाद मम्मा पापा और एक एक कर के सभी मेहमानों ने मुझे बारी बारी अपने हाथों से खीर खिलाई और मुझे आशीर्वाद प्रदान किया .

अब आई मम्मा पापा की बारी 
मेरी छोटी छोटी प्यारी सहेलियाँ पुरे समय मेरे साथ रही और मुझे बहलाती रही .सब कुछ बहुत अच्छे हुआ .


उधर इण्डिया में दादू दादी ये सब कुछ वेबकेम पर देख रहे थे. उन्होंने भी मुझे बहुत सारे आशीर्वाद दिए .पापा ने अपने ऑफिस के विदेशी मित्रों को भी आमंत्रित किया था. उन सभी ने इस पुरे फंक्शन को बहुत एन्जॉय किया उसमे भाग भी लिया और भौजन का भी आनंद लिया  .
पापा के विदेशी मित्र मेरी आरती करते हुए 

खाना खाते वक्त उनके गोरे गोरे गाल लाल हो गए और आँखों से पानी आने लगा कहते रहे इट्स टू हॉट , बट वेरी टेस्टी :)

यम यम